Kabeera Soya Kya Kare Mp3 Song Nitin Mukesh Lyrics

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January 13, 1995

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Kabeera Soya Kya Kare

Kabeera Soya Kya Kare Mp3 Song, Download Kabeera Soya Kya Kare, Kabeera Soya Kya Kare Mp3 DownloadThe "Kabeera Soya Kya Kare", song of Dance cassette "Kabir Vaani" was launched in 1995. Traditional introduced as a song writer.Roughly Calculated revenue to T-Series from this soundtrack is $2371.It quickly get up on video platform youtube in 1930, and is viewed by 124.06 thousand audience.T-Series, casted this soundtrack after producing "Ye Haridwar Hai" song performed by Narendra Chanchal.The song was originally composed by Nitin Mukesh so on it was enjoyably sung by Nitin Mukesh.This music track was released 23 years before, heading to hit by Hindi music lovers.It is Nitin Mukesh`s 153th soundtrack, Out of 245 .Nitin Mukesh welcomedseveral rewards for well work of a Dance music track.Primary singer Nitin Mukesh performed in two jobs, took part as singers and composer.Music track is to hand on itunes for $0.99 or full track list just for $1.98.

Info You Must Know

Song Name Kabeera Soya Kya Kare
CategoriesHindi.
AlbumKabir Vaani.
ComposerNitin Mukesh.
GenreDance.
LabelT-Series.
LyricstTraditional.
SingerNitin Mukesh.
Duration 08:35
Record on January 13, 1995
Album Price $1.98
Song Price $0.99
Buy on iTune Purchase

Kabeera Soya Kya Kare Lyrics

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कबीरा सोया क्या करे ? बैठा रहू अरु जाग
जिनके संग ते बिछलों वाही ते संग लाग
ज्यों तिल माही तेल है ज्यों चकमक में आग
तेरा साईं तुझ में, जाग सके तो जाग

माला फेरत जुग भया, मिटा न मन का फेर
कर का मनका छोड़ दे, मन का मनका फेर
माला तो कर में फिरे, जीभ फिरे मुख माही
मनवा तो चहुदिस फिरे, ये तो सुमिरत नाही

राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोये
जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होये
पारस में अरु संत में बडो अन्तरो जान
वो लोहा कंचन करे, ये कर दे आप समान

सुमिरन सूरत लगाये के मुख से कछु न बोल
बहार के पट बंद कर, अन्दर के पट खोल
श्वास श्वास पे नाम ले वृथा श्वास न खोये
न जाने यह श्वास का आवन होये न होये

जागो लोगों मत सुवो, न करो नींद से प्यार
जैसे सुपना रैन का, ऐसा ये संसार
कहे कबीर पुकार के दो बातें लिख दे
के साहब की बंदगी, भूखों को कुछ दे

कबीरा वा दिन याद कर पग ऊपर तल शीश
मृतुलोक में आये के बिसर गया जगदीश
चेत सवेरे बावरे फिर पाछे पछताए
तुझको जाना दूर है कहे कबीर जगाये

साईं उतना दीजिये जामें कुटुंब समाये
मैं भी भूखा ना रहू साधू ना भूखा जाए
कबीरा खडा बाज़ार में मांगे सबकी खैर
ना काहू से दोस्ती न काहू से बैर

कथा कीर्तन कलि विखे भवसागर की नाव
कहे कबीर भवतरन को, नाही और उपायों
कहना था सो कह दिया अब कछु कहा ना जाए
एक रहा दूजा गया दरिया लहर समाये

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